सोमवार, 7 मार्च 2011

पाठकों के नाम एक ख़त

हिंदी में बहुत कुछ लिखा गया है, लिखा जा रहा है | मजेदार बात ये है कि अच्छा भी है | फिर भी, विश्व साहित्य की बहुत सी कृतियों को हिंदी में अनुवाद नहीं किया गया है | अनुवाद की मेरी कोशिश इस चिट्ठे पर जारी रहेंगी | अभी कुछ फुटकर आसान अनुवाद किये जायेंगे | आप लोगों के प्यार और ख़ुलूस को मद्देनज़र रखकर ही सिलसिला आगे बढ़ाया जाएगा | विश्व साहित्य के कुछ दुर्लभ नगीनों को इसमें जगह दी जायेगी | मुझे उम्मीद है मेरी कोशिशों को आप पाठकों का भरपूर प्यार मिलेगा | 

-- आपका ,
नीरज बसलियाल  

1 टिप्पणी:

  1. हिंदी साहित्य में आपके योगदान को अवश्य ही अक दिन समुचित मान सम्मान मिलेगा | हार्दिक शुभकामनाएं |

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