सोमवार, 21 मार्च 2011

आँसू और हँसी





नील नदी के किनारे, सांझ के झुटपुटे में, सियार घड़ियाल से मिला और उन्होंने रूककर एक दूसरे को नमस्ते किया |


सियार ने कहा, "सब कैसा चल रहा है, जनाब ?"


घड़ियाल ने जवाब दिया, "बहुत बुरा वक़्त है | कभी कभी अपने दुख दर्द से मैं रोने लगता हूँ, और बाकी लोग कहते हैं, 'ये कुछ नहीं बस घडियाली आँसू हैं |' ये बात मुझे इतनी चुभती है कि क्या बताऊँ |"


तब सियार ने जवाब दिया, "तुम अपने दुख, दर्द की बात करते हो पर एक बार जरा मेरे बारे में भी तो सोचो | मैं इस दुनिया की खूबसूरती, इसके अचरजों, और इसके चमत्कारों को निहारता हूँ, और बहुत खुश होता हूँ | हँसता हूँ, बेहद जोर जोर से, जैसे दिन का उजाला चारों ओर फैलता है | और बाकी लोग कहते हैं, 'ये कुछ नहीं बस सियार की हुआं-हुआं है |'"



4 टिप्‍पणियां:

  1. क्या जानवरों ने भी गढ़ रखे होंगे मनुष्यों से सम्बंधित मुहावरे ??
    आपका यह ब्लॉग राजस्थान पतिरिका के चर्चित ब्लोग्स में शुमार हुआ ...बधाई

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  2. कृपया पतिरिका के स्थान पर पत्रिका पढ़ें

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